हडको ने देश में बड़ी संख्या में जलापूर्ति परियोजनाओं को वित्त पोषित किया है जिसमें जलापूर्ति वृद्धि, पुनर्वास, विस्तार के साथ-साथ सेवा-वंचित क्षेत्रों के लिए नई योजनाएं शामिल हैं।
हडको ने जल आपूर्ति योजनाओं के विभिन्न घटकों को वित्त पोषित किया है, जैसे; स्रोत-वियर का विकास/बैराज/नदी से जल प्राप्ति, अंतरण लाइन, पारंपरिक ट्रीटमेंट संयंत्र, भंडारण सुविधाएं-सम्प, ओवर हेड टैंक, वितरण नेटवर्क, पंपिंग स्टेशन, ऊर्जा बचत उपकरण, रिसाव का पता लगाने वाली प्रणाली, मीटरिंग, एक्वीफर रिचार्ज इत्यादि। हडको ने इन परियोजनाओं को राज्य स्तरीय संस्थाओं और समूहों जैसे राज्यों के जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड, शहरी स्थानीय निकायों, पीएचई विभागों, जीवन प्राधिकरण, ट्रस्ट इत्यादि को वित्त पोषित किया है। हडको ने राज्यों द्वारा बांड निवेश के साथ नियोजित परियोजनाओं में भी भाग लिया है। हडको राज्य सरकारों को अभिनव वित्त पोषण तंत्र के आधार पर राज्य सरकार द्वारा आंशिक समर्थन के साथ छोटे और मध्यम स्तरीय शहरों के लिए अपनी जल आपूर्ति योजनाओं को शुरू करने में मदद करता है।
हडको, मुख्यमंत्री शहरी पेयजल योजना की राज्य कार्य नियोजन योजनाओं के तहत मध्य प्रदेश राज्य में शहरी स्थानीय निकायों में बड़ी संख्या में जलापूर्ति में सुधार के लिए सहायता प्रदान कर रहा है । कुछ अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाएं हैं; ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम के परिधीय क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति के वितरण नेटवर्क को विकसित करने के लिए हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड को वित्तीय सहायता, तेलंगाना पेयजल आपूर्ति -तेलंगाना के 3 जिलों के ग्रामीण, शहरी, संस्थागत, वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करने के लिए व्यापक जल आपूर्ति परियोजना, तमिलनाडु में अरुपकोट्टई और कोयंबटूर में जल आपूर्ति परियोजनाओं के लिए तमिलनाडु जल आपूर्ति और ड्रेनेज बोर्ड इत्यादि को सहायता l हडको के योगदान से देश की एक बड़ी आबादी को वांछनीय गुणवत्ता और मात्रा की जल आपूर्ति संभव कराने और बढ़ाने में मदद मिली है।
हडको के अनवरत पर्यावास विकास दृष्टिकोण को नीतिगत रूप में अंतरित किया गया है, जिसके अंतर्गत जल आपूर्ति परियोजनाओं को स्वीकृति प्राप्त स्थानों पर साथ में ही सीवरेज योजनाओं पर भी ध्यान दिया जाता है। हडको के पास देश में स्वच्छता परियोजनाओं की एक वित्तपोषित श्रृंखला है जिसमें ऑन-साइट व्यक्तिगत सुविधाएँ जैसे दो पिट वाले देशी फ्लश शौचालय इकाइयां, सेप्टिक टैंक, बायोगैस डाइजेस्टर शामिल हैं; या स्थलीय अथवा गैर-स्थलीय सामुदायिक सुविधाएँ जिसमें पूर्व में निर्दिष्ट प्रौद्योगिकियों के अलावा ऑक्सीकरण तालाब, पारंपरिक सीवेज ट्रीटमेंट संयंत्रों सहित सीवरेज प्रणाली भी शामिल है, जो प्रवाह के अनुमेय निर्वहन मानकों को प्राप्त करने के लिए होती है।
हडको ने बुनियादी स्वच्छता, एकीकृत कम लागत वाली स्वच्छता सेवाएँ, वाम्बे(VAMBAY), फुटपाथ पर रहने वालों, रैन बसेरा योजनाओं आदि के राष्ट्रीय कार्य योजना कार्यक्रम के तहत व्यक्तिगत, सामुदायिक और सार्वजनिक स्तर पर स्वच्छता सुविधा के कार्यान्वयन में सक्रिय रूप से भाग लिया है। सार्वजनिक/सामुदायिक शौचालय सुविधाएँ प्रदान करने के लिए एमपीएलएडी निधियों का उपयोग करते हुए और गैर सरकारी संगठनों तथा शहरी स्थानीय निकायों को शामिल करके एक अभिनव वित्त पोषण तंत्र का उपयोग करते हुए हडको ने अपना स्वयं का सब्सिडी कार्यक्रम तैयार किया है । हडको ने कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर निधि) के तहत प्रमुख तकनीकी संस्थानों के साथ मिलकर कुम्भ मेले में स्व-कम्पोस्टिंग तंत्र वाले अस्थाई शौचालयों के निर्माण को वित्तपोषित किया।
हडको सीवरेज सिस्टम, एसटीपी सिस्टम इत्यादि के निर्माण के लिए विभिन्न यूएलबी/राज्य सरकार समूहों को वित्तीय सहायता भी प्रदान कर रहा है। इसके अलावा, हडको ने ‘अमृत’ जैसी सरकार की विभिन्न प्रमुख योजनाओं में वित्तीय कमीं को पूरा करने के लिए राज्य सरकार को वित्तीय सहायता भी प्रदान की है। हाल ही में, हडको ने तमिलनाडु की विल्लुपुरम और तिंडीवनम नगर पालिकाओं में भूमिगत सीवरेज योजनाओं के लिए और पंजाब तथा राजस्थान के शहरी स्थानीय निकायों में सीवरेज सुविधाओं आदि के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की है।
तेजी से बढ़ रहे शहरीकरण के परिणामस्वरूप कार्यालय परिसरों, सड़क फुटपाथों और ऊंचे अपार्टमेंट भवनों का निर्माण हुआ है, जिससे पक्की भूमि क्षेत्र बढ़ा है । पक्की सतहों की वजह से बारिश के दौरान सतही जल बहाव में वृद्धि हुई है और इसलिए शहरों में अचानक बाढ़ से बचने के लिए एक कुशल शहरी जल निकासी प्रणाली की आवश्यकता है। शहरी जल निकासी परियोजनाओं को आमतौर पर सीवरेज प्रणाली परियोजनाओं के साथ कार्यान्वित किया जाता है। हालांकि, हडको शहरी क्षेत्रों में बाढ़ से निपटने के लिए विशिष्ट शहरी जल निकासी परियोजनाओं को बुनियादी सेवाओं के महत्वपूर्ण घटकों में महत्वपूर्ण घटक के रूप में बढ़ावा दे रहा है।
हडको ने ओडिशा के पांच शहरों भुवनेश्वर, कटक, बरहामपुर, राउरकेला और संबलपुर में तूफानी जल निकासी के लिए परियोजना में अपनी वित्तीय सहायता प्रदान की है। इसके अतिरिक्त, पश्चिम बंगाल में बाढ़ प्रभावित जिलों में जल निकासी के लिए तथा जयपुर और लखनऊ में जल निकासी नेटवर्क इत्यादि के लिए भी वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। जल निकासी परियोजनाओं में अक्सर सड़क पुनर्निर्माण, नाले तथा नहरों आदि के निर्माण और रखरखाव को भी शामिल किया जाता है। हडको, मध्य प्रदेश (मुख्यमंत्री शहरी अधोसंराचन योजना), भरतपुर, राजस्थान में तूफान जल निकासी कार्यों, पंजाब के विभिन्न शहरी स्थानीय निकायों में बुनियादी ढांचे के निर्माण-कार्यों इत्यादि से जुड़ी योजनाओं को वित्तपोषित कर रहा है । इन परियोजनाओं के लिए क्रियान्वयन एजेंसियां राज्य के सार्वजनित क्षेत्र के उपक्रम, केंद्र के सार्वजनित क्षेत्र के उपक्रम, राज्य स्तर के नोडल विभाग जैसे लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, सिंचाई विभाग इत्यादि हैं।